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यदि लिखना है तो...........

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यदि लिखना है तो संग्राम लिखो
कोई वीरता का नया गान लिखो
कोई पूँछे वीर होता है क्या
तो चन्द्रगुप्त बलवान लिखो ।।१।।

यदि लिखना है तो वेद पुराण लिखो
कुछ गीता और कुरान लिखो
कोई पूँछे धर्म होता है क्या
तो गुरबानी और आज़ान लिखो ।।२।।


यदि लिखना है तो राम लिखो
पुरुषों में पुरुष महान लिखो
कोई पूँछे पौरुष होता है क्या
बस राम लिखो, बस राम लिखो ।।३।।

यदि लिखना है तो कर्म लिखो
सबसे महान ये धर्म लिखो
कोई पूँछे कर्म होता है क्या
एक फ़ौजी और किसान लिखो ।।४।।

यदि लिखना है तो विज्ञान लिखो
नित नए नए आयाम लिखो
कोई पूँछे विज्ञान होता है क्या
तो भाभा और कलाम लिखो ।।५।।


यदि लिखना है तो बलिदान लिखो
परहित सत्कर्म बखान लिखो
कोई पूँछे बलिदानी होता है क्या
तो सुभाष और आज़ाद लिखो ।।६।।

यदि लिखना है तो इंकलाब लिखो
नयी दुनिया का एक ख्वाब लिखो
कोई पूँछे इंकलाब है क्या
तो भगत सिंह का नाम लिखो ।।७।।

यदि लिखना है तो प्रेम लिखो
नयनों के मिलने का खेल लिखो
कोई पूँछे प्रेम होता है क्या
दो दिलों का अनुपम मेल लिखो ।।८।।

यदि लिखना है तो खुद पर विश्वास लिखो
एक अमित नया आकाश लिखो
जग में प्रसिद्ध हो नाम तेरा
कुछ तो विजय की आस लिखो ।।९।।

यदि लिखना है तो ईमान लिखो
अपने पर कुछ कर अभिमान लिखो
कोई पूँछे अभिमान होता है क्या
तो खुद की अलग पहचान लिखो ।।१०।।

यदि लिखना है तो इतिहास लिखो
उस काल पर अपनी छाप लिखो
कोई पूँछे भला इतिहास है क्या
तो अमरत्व का वरदान लिखो ।।११।।

यदि लिखना है तो कुछ ख़ास लिखो
कुछ अलग यूँ ही अनायास लिखो
बन जाए कोई साहित्य नया
कुछ ऐसा कलम से आज लिखो ।।१२।।

लिखना है तो अभय का दान लिखो
खुद में वीरता का प्रमाण लिखो
कोई पूँछे वीरता होती है क्या
तो खुद का जग में नाम लिखो ।।१३।।

यदि लिखना है तो क्रांति का बीज लिखो
रग रग में नयी एक आग लिखो
कोई पूँछे क्रांति होती है क्या
तो प्रबल शक्ति प्रताप लिखो ।।१४।।

लिखना है तो शान्ति का पैगाम लिखो  
एक अमन का अरमान लिखो
कोई पूँछे अमन होता है क्या
तो सकल जगत में प्यार लिखो ।।१५।।


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-रजत द्विवेदी















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आवा बन्धु,आवा भाई सुना जो अब हम कहने जाए। सुना ज़रा हमरी ये बतिया, दै पूरा अब ध्यान लगाय। कहत हु मैं इतिहास हमारा जान लै हो जो जान न पाए।   जाना का था सच वह आपन जो अब तक सब रहे छुपाय। जाना का था बोस के सपना,जो अब सच न है हो पाए। जान लो का था भगत के अपना, जो कीमत मा दिए चुकाय। जाना काहे आज़ाद हैं  पाये वीर गति अरु बीर कहाय। जान लो काहे शेर मर गए ,हो गए गीदड़ सिंह कहाय ।।१॥ ये आल्हा बरनन है उनखर,जो भारत के लाल कहाय। बड़ी अनोखी उनखर गाथा,हमके उनखर याद दिलाय। उन जोधन के राष्ट्रप्रेम के कोउ प्रेमी पार न पाए। ऊ मतवाले अलबेले थे,अपना ऋण जे दिए  चुकाय। पहिन लिहिन सब कफ़न बसंती, वीरगति को पाना चाय। एक से एक भयंकर जोधा,बरछी तीर कटार के नाइ। एक से एक विद्वान पुरोधा जो भक्ति का गीत सुनाय ।।२॥ बाजत रहे संख समर के,देत सुनाई वीर पुकार। रणभेरी गूँजी थी अइसन,उत्तेजित होते नर नार। करमभूमि फिर धरती बन गई ,होवत रहे वार पे वार। ...

वीर सुभाष तेरी जय हो ।

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आलोक...

अरुण आलोक की जयकार बोलो। जगत की ज्योतियों के द्वार खोलो। जगा है नींद से ये भोर जब से, सुनाई दे रहा है शोर तब से। कोलाहल है ये एक नई ज़िंदगी का। पशु पक्षी, विपिन का और पवन का। वही आलोक है, वो ही गगन है। वो ही स्वच्छंद सा उन्मुक्त मन है। वो ही उन्माद मन में अा रहा। वो ही एक भाव हिय पिघला रहा है। जो एक उम्मीद जग को बांधती है। निशा के अंत को शुभ मानती है। कि देखो फूल सब मुस्का रहे हैं। भंवर को प्रेम से पुचकारते हैं। गगन पंखों को उड़ते देखता है। रवि की ज्योति से दृग सेंकता है। धरा खिल जाती है रश्मि को पाकर। नया जीवन मिला ज्यों जाग कर। - रजत द्विवेदी https://www.yourquote.in/rajat-dwivedi-hmpx/quotes/arunn-aalok-kii-jykaar-bolo-jgt-kii-jyotiyon-ke-dvaar-kholo-1pk2v