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विद्युत की इस चकाचौंध में.....


विद्युत की इस चकाचौंध में देख दीप की लौ रोती है।
बहु नयनों में अंधियारा है, चंद घरों में ज्योति है।

यह समाज क्यों गर्त में पड़ा, सुख की तान सुनाता है।
थोथी बात बखाने ख़ुद की, तम से घिरता जाता है।

आज पतन की राह पर चला है कारवां मानव का।
भूख से ग्रसित तड़प रहे घर, खुल गया मुख दानव का।

नगर के एक छोर पर देखो भात दाल ना रोटी है।
दूजी ओर लुटाते देखो व्यर्थ में ही लोग मोती है।

ये कैसा है फ़र्क जगत का एक हांथ में है लक्ष्मी,
दूजे में है लिए हुए जो बिलख रही भूखी बच्ची।

कहो क्यों भला नियति की झोली इतनी छोटी है।
एक वर्ग को कंकड़ देता, दूजे को दे मोती है।

विद्युत की इस चकाचौंध में देख दीप की लौ रोती है।
बहु नयनों में अंधियारा है, चंद घरों में ज्योति है।

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इस सुबह उस उफक़ पर.......

इस सुबह उस उफक़ पर जब अफताब इश्क़ का आया होगा, हर किसी की ज़िंदगी में इश्क़ बरसाया होगा। है इधर ये छांव जो क्या तुमको भी है मिल रही, या कि बस मेरे ही घर को धूप आज आई नहीं। क्या कभी तुमको भी इश्क़ ने इतना तरसाया होगा? इस सुबह उस उफक़ पर जब अफताब इश्क़ का आया होगा। क्या कभी तुमको मिली वो ठंडी सबा इस सहर की, जिसको अरसे से भेजा करता था मैं तेरे नाम पर। मुझको अब तक ना मिला पैग़ाम तेरे मिलने का, क्या कभी इस क़दर किसी का दीदार तुझे तड़पाया होगा? इस सुबह उस उफक़ पर अफताब इश्क़ का आया होगा। आज भी चाहत मुझे है बस तेरे इक नाम से, आज भी खोता सुकूं हूं बस तेरे ही नाम पर। मुझको मिलता ही नहीं है एक भी पल चैन का, क्या कभी किसी के खयाल ने तुझको भी नींद से जगाया होगा? इस सुबह उस उफक़ पर अफताब इश्क़ का आया होगा। - रजत द्विवेदी https://www.yourquote.in/rajat-dwivedi-hmpx/quotes/subh-us-uphk-pr-jb-aphtaab-ishk-kaa-aayaa-hogaa-hr-kisii-kii-o3hoi

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