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शुक्र है भगवान अभी तक धरती पर नहीं आए..

शुक्र है भगवान अभी तक धरती पर नहीं आए..

इंसान अपने स्वार्थ के लिए मंदिर तक बांट जाए,

शुक्र है भगवान अभी तक धरती पर नहीं आए।

जो वापस आते राम इस घोर कलियुग में तो कहां जाते,

उनका घर मंदिर तो सियासत के ठेकेदार खा गए।

शुक्र है भगवान अभी तक धरती पर नहीं आए..


भगवान अपने भक्तों के हृदय में वास करते हैं सुना है,

भक्त तो देखो भगवान का घर ही उड़ा गए।

आज पुण्यभूमि सत्ता की रंगशाला बन गई है,

अब यहां कोई भक्ति का दीप कैसे जलाए?

शुक्र है भगवान अभी तक धरती पर नहीं आए..


चंदन सी महक उठती थी राम के भारत की धरती,

आज तो यहां बस रक्त की गंध ही उड़ती है ओर।

रंग, जात, धर्म के भेद का दिखता नहीं कोई तोड़।

ऐसे में भगवान भी कहो किस को अपना बनाएं।

शुक्र है भगवान अभी तक धरती पर नहीं आए..


- रजत द्विवेदी





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