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कलम 


See the source imageशब्द शब्द में आग लगाती, कलम उगलती चिंगारी 
कभी करे श्रृंगार जगत का, कभी विनाश की तैयारी|   

कभी खड्ग सी वार करे और कभी घाव पर मरहम सी 
कभी समर संघोष करे और कभी करे जग में शान्ति|

अमित अनल संचार शरों में करे, कलम की शक्ति अपार 
सिंहासन तक हिल जाते हैं जब जब शब्द करें हुंकार|

शस्त्र कलम सी नहीं जगत में,कलम वीरता की भरमार 
क्रान्ति बीज बोती कागज़ पर,गढ़ती नये नये अंगार|

-रजत द्विवेदी

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वीर सुभाष तेरी जय हो ।

वीर  सुभाष  तेरी जय हो ।  वीर  सुभाष  तेरी जय हो। वीर  सुभाष  तेरी जय हो । उपकारी तेरी करनी  की कीरत यहाँ अजय हो । वीर  सुभाष  तेरी जय हो ।  फूँक दिया था जो  तूने  वह बिगुल क्रांति का जग में।   बसा लिया जो तूने  रंग तिरंगा रग  रग में।  निकल पड़ा  था तू जग में  करने भारत का  उद्धार आज़ाद  कराने  भारत को  करने मातृभूमि पर उपकार  तेरी उस कोशिश की जय हो ।  वीर  सुभाष  तेरी जय हो ।    अपनी  पहचान छुपाकर के  तूने भारत का नाम  किया ।  अपना जीवन त्याग कर  तूने भारत भविष्य रचा ।  अधीर हो उठी जनता आज़ादी का यह रस्ता जचा । कर डाला तूने वो कमाल जिसपर जग को विस्मय हो । वीर  सुभाष  तेरी जय हो । -रजत द्विवेदी 

आल्हा वीर रस

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कातिब..

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