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पंख टूटे हैं तो क्या......................

पंख टूटे हैं तो क्या, हिम्मत अब भी बाकी है
आसमाँ ऊँचा है तो क्या, हौसला अब भी बाकी है|
उन्मुक्त गगन इंतज़ार कर रहा, उड़ान अब भी बाकी है
नाम हमारा सभी जानते, पर पहचान बनानी बाकी है|

दीपक बुझने को आया, अंधियारा फिर से छाया
आँधियों से लड़ती जलती दिए में लौ अब भी बाकी है|
घनी रात ये कारी सी है, फिर से जंग उजियारे की है
अंधियारे को चीर गगन पर भोर निकलनी बाकी है|

क्षीण पड़ा है शरीर रण में, जान अभी कुछ बाकी है
मस्तक पर खड़ा शत्रु है, जंग अभी भी बाकी है|
नियति से लड़कर अब भी तकदीर बदलनी बाकी है
काल की छाती पर अपनी भी छाप छोड़नी बाकी है|

-रजत द्विवेदी 

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वीर सुभाष तेरी जय हो ।

वीर  सुभाष  तेरी जय हो ।  वीर  सुभाष  तेरी जय हो। वीर  सुभाष  तेरी जय हो । उपकारी तेरी करनी  की कीरत यहाँ अजय हो । वीर  सुभाष  तेरी जय हो ।  फूँक दिया था जो  तूने  वह बिगुल क्रांति का जग में।   बसा लिया जो तूने  रंग तिरंगा रग  रग में।  निकल पड़ा  था तू जग में  करने भारत का  उद्धार आज़ाद  कराने  भारत को  करने मातृभूमि पर उपकार  तेरी उस कोशिश की जय हो ।  वीर  सुभाष  तेरी जय हो ।    अपनी  पहचान छुपाकर के  तूने भारत का नाम  किया ।  अपना जीवन त्याग कर  तूने भारत भविष्य रचा ।  अधीर हो उठी जनता आज़ादी का यह रस्ता जचा । कर डाला तूने वो कमाल जिसपर जग को विस्मय हो । वीर  सुभाष  तेरी जय हो । -रजत द्विवेदी 

आल्हा वीर रस

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कातिब..

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