Skip to main content

पौरुष

स्वास स्वास में नई आंधियां नया जन्म जब पाती हैं
और रगों में अमित अनल की धाराएं चल जाती हैं,
कतरा कतरा लहू ज्वार की लहरों से भर जाता है,
तभी मनुज के पौरुष का बल अभय अजय हो जाता है।

कितने सिंहों का बल देखो फिर उस नर में आ जाता है,
छोड़ आलस्य और भोग विलास जो रण में खड़ग उठाता है,
कितने गजराजों की चिंघाडें भी फिकी पड़ जाती है,
उस नर के कंठ कमल से जब जयनाद फूट कर आती है।

बंजर भूमि पर भी एक नया सृजन का अंकुर फूट जाता है,
नर जब अपने कर्म के बल से धरती पर हल चलाता है।
और उसके मन में पलते सब दुख,संशय मिट जाते हैं,
चहुं ओर सब लोग उस नर का विजय गीत ही सुनाते हैं।

राख से उठकर ख़ाक बनने तक जो निज कर्मों में लीन रहा,
जग की सारी पीड़ाओं को जिसने वीरता से सहा,
वो मनुज मरण के बाद भी जग में सदा सदा को अमर हुआ,
औरों के पथ दर्शन हेतु उसका जीवन फिर धर्म बना।

-रजत द्विवेदी 

Comments

Popular posts from this blog

इस सुबह उस उफक़ पर.......

इस सुबह उस उफक़ पर जब अफताब इश्क़ का आया होगा, हर किसी की ज़िंदगी में इश्क़ बरसाया होगा। है इधर ये छांव जो क्या तुमको भी है मिल रही, या कि बस मेरे ही घर को धूप आज आई नहीं। क्या कभी तुमको भी इश्क़ ने इतना तरसाया होगा? इस सुबह उस उफक़ पर जब अफताब इश्क़ का आया होगा। क्या कभी तुमको मिली वो ठंडी सबा इस सहर की, जिसको अरसे से भेजा करता था मैं तेरे नाम पर। मुझको अब तक ना मिला पैग़ाम तेरे मिलने का, क्या कभी इस क़दर किसी का दीदार तुझे तड़पाया होगा? इस सुबह उस उफक़ पर अफताब इश्क़ का आया होगा। आज भी चाहत मुझे है बस तेरे इक नाम से, आज भी खोता सुकूं हूं बस तेरे ही नाम पर। मुझको मिलता ही नहीं है एक भी पल चैन का, क्या कभी किसी के खयाल ने तुझको भी नींद से जगाया होगा? इस सुबह उस उफक़ पर अफताब इश्क़ का आया होगा। - रजत द्विवेदी https://www.yourquote.in/rajat-dwivedi-hmpx/quotes/subh-us-uphk-pr-jb-aphtaab-ishk-kaa-aayaa-hogaa-hr-kisii-kii-o3hoi

वीर सुभाष तेरी जय हो ।

वीर  सुभाष  तेरी जय हो ।  वीर  सुभाष  तेरी जय हो। वीर  सुभाष  तेरी जय हो । उपकारी तेरी करनी  की कीरत यहाँ अजय हो । वीर  सुभाष  तेरी जय हो ।  फूँक दिया था जो  तूने  वह बिगुल क्रांति का जग में।   बसा लिया जो तूने  रंग तिरंगा रग  रग में।  निकल पड़ा  था तू जग में  करने भारत का  उद्धार आज़ाद  कराने  भारत को  करने मातृभूमि पर उपकार  तेरी उस कोशिश की जय हो ।  वीर  सुभाष  तेरी जय हो ।    अपनी  पहचान छुपाकर के  तूने भारत का नाम  किया ।  अपना जीवन त्याग कर  तूने भारत भविष्य रचा ।  अधीर हो उठी जनता आज़ादी का यह रस्ता जचा । कर डाला तूने वो कमाल जिसपर जग को विस्मय हो । वीर  सुभाष  तेरी जय हो । -रजत द्विवेदी 

आसमान से ऊँचा......

आसमान से ऊँचा क्या है?कौन समुद्र से गहरा?  कौन भूमि से भारी जग में?कौन जल से पतला?  कौन सूर्य से भी ज्यादा चमक रहा इस जग में?  कौन डूब कर गिर जाता है घने काले गर्त में?  कौन यहाँ पर अमर हो जाते?कौन यहाँ नश्वर है?  कौन यहाँ पर सदा हारते?कौन यहाँ अजर है?  आसमान से ऊँचा जग में स्वाभिमान है नर का और समुद्र से गहरा जग में विशाल सागर प्रेम का| भूमि से भी भारी जग में पाप,कपट और छल है| जल से भी पतला इस जग में ज्ञान का गंगाजल है| सूर्य से भी ज्यादा चमकता मनुष्य का कर्म है| और डूबा देता जो गर्त में धर्म नहीं अधर्म है| सच्चा शूरवीर जगत में सदा सदा अमर है| मूढ़मती पथहीन मनुज तो निश्चय ही नश्वर है| यहाँ हारते सदा वही जो संबंधों से डरते हैं | जो समाज से संबंध बना सके, वो ही मनुज अजर है| -रजत द्विवेदी