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क्या ली तुमने है उनकी सुधि ?

क्या ली तुमने  है उनकी सुधि ? जो  भारत पर जान न्यौछार रहे भारत का मान है बढ़ा रहे भारत की आन हैं बना रखे उसके स्वर्णिम इतिहास को जो चार चाँद है लगा रहे क्या ली तुमने  है उनकी सुधि ? क्यों मूरख आज  हो बने हुए ? क्यों देशद्रोह तुम करते हो ? रोते पीटते उनका रोना जो भारत के टुकड़े  करना चाहे क्यों उसका साथ निभाते हो? याकूब,अफज़ल हैं याद तुम्हें पर भगत राजगुरु भूल गए। कहते इन  आंतकी को राजपुरुष क्यों भगत बोस  को विद्रोही कहो ? क्या ली तुमने  है उनकी सुधि ? क्यों भ्रष्ट हुई तेरी बुद्धि ? क्या धरम तुम्हारा बड़ा हुआ'? क्या कौम तुम्हारी बड़ी हुई ? क्यों मान लिया उनका लोहा जिनकी हथेली थी रकक्तसनी ? याकूब तुम्हारा भगवान हुआ अफज़ल है तुम्हारा गुरु बना पर जिस आज़ाद अपना जीवन दिया उसे छद्मवेशी आतंकी कहा । ऐसा क्या दुःख तुमको हो रहा ऐसी क्या तुमको छति लगी ? क्यों ना तुमने उनकी ली सुधि ? पर सुनलो ऐ एहसान फारमोशों कान खोल तुम सुन लो जितने भी अफज़ल आएंगे हर अफज़ल को हम मारेंगे। जितने या...

प्रबल त्याग की वीर गाथा

प्रबल त्याग की वीर गाथा  प्रबल त्याग की वीर गाथा  जिसको है इतिहास  भी गाता  जो वीरों का मान बढ़ाता  रणधीरों की पहचान बताता  प्रबल त्याग की वीर गाथा । चीख रही चित्तोड़ हवेली खेली जहाँ थी खून की होली । आज भी है वहाँ गूँजती उस अमर त्याग की वीर गाथा ।                                                                               घोर घनेरी रात वो थी लगती अमावस रात वो थी । शोणित से सनी तलवारें गूँजी भय से व्याकुल मन थर्राया । लेने इक मासूम का जीवन बनबीर वहां पर तब आया । सत्ता की लालच में उसने अपनों का था रक्क्त बहाया । पता चले है जीवित वारिस तब खडग उठा था वह लाया । जब\तक उदय सिंह है जिन्दा कैसे मेवाड़  मेरा होगा । सोच लिया मैं जीतूँगा उदय को अब मारना होगा । चल निकला वह राजभवन खोज रहा था वारिस को। भूल गया लेकिन ...

सुनो ज़रा क्या कहते हैं................जब मैंने उनसे ये पूंछा ।

सुनो ज़रा क्या  कहते हैं................जब मैंने उनसे ये पूंछा । अजय खड़ा तू ढाल हिमालय किसकी रक्षा करता है ? नभचुम्भी हे भाल हिमालय किसकी गाथा गाता है ? शीशशिखर तू बना हुआ है सीना ताने खड़ा हुआ है। आखिर वह क्या है तू जिसका मान बढ़ाने अड़ा हुआ  है ? सुनो ज़रा क्या कहता है हिमराज जब मैंने ये पूंछा । मैं हिमराज हिमालय हूँ भारत के मस्तक की शोभा। मैं गिरिराज हिमालय हूँ भारतीय संस्कृति की आभा । मैं ढाल हिमालय  भारत का जो रक्षा करता सदियों से उस देवभूमि भारत की जो जगतगुरु है सदियों से । मैं हिमराज हिमालय हूँ जिसके निर्मल हिम पर्वत से बहती असंख्य अविरल नदियाँ। जो अपना शीतल पानी दे भारत को दान हैं करतीं जो जीवन की लिए  सुखदाई है जो भारत में कलकल बहकर समृद्ध सौहार्द लाई है । मैं बड़भागी हिमालय  हूँ जिस पर शंकर का आसन है मैं कैलाश हिमालय हूँ जिस पर शिव करते शासन हैं । सुनकर हिमराज की  यह वाणी जिसने  भारत कथा  बखानी मैं आगे बढ़ कर चला गया । चलते चलते जो  मुझे मिले ...

वीर सुभाष तेरी जय हो ।

वीर  सुभाष  तेरी जय हो ।  वीर  सुभाष  तेरी जय हो। वीर  सुभाष  तेरी जय हो । उपकारी तेरी करनी  की कीरत यहाँ अजय हो । वीर  सुभाष  तेरी जय हो ।  फूँक दिया था जो  तूने  वह बिगुल क्रांति का जग में।   बसा लिया जो तूने  रंग तिरंगा रग  रग में।  निकल पड़ा  था तू जग में  करने भारत का  उद्धार आज़ाद  कराने  भारत को  करने मातृभूमि पर उपकार  तेरी उस कोशिश की जय हो ।  वीर  सुभाष  तेरी जय हो ।    अपनी  पहचान छुपाकर के  तूने भारत का नाम  किया ।  अपना जीवन त्याग कर  तूने भारत भविष्य रचा ।  अधीर हो उठी जनता आज़ादी का यह रस्ता जचा । कर डाला तूने वो कमाल जिसपर जग को विस्मय हो । वीर  सुभाष  तेरी जय हो । -रजत द्विवेदी 

हिंदी की जय हिंदुस्तान की जय

हिंदी की जय  हिंदुस्तान की जय  हिंदी की जय  हिंदुस्तान की जय भारत के सम्मान की जय भारत के पहचान की जय भारत में रहनेवाले  उस प्रत्येक इंसान की जय । हिंदी हमारी पहचान है हिंदी हमारा अभिमान है उस कभी कम होने वाले हमारे अभिमान की जय हिंदी की जय हिंदुस्तान की जय । हिमालय  से हिन्द महासागर तक जिस भाषा को सबने गाया कच्छ से तवान्ग तक जिस भाषा ने हमें सिखाया की भारत हमारी धरती है भारत के उस सुरीली आवाज़ की जय । यह एक स्वरि है यह सुगम सरल है यह सीधी है यह मीठी है यह भारत का मान है यह इतिहास का गायक है यह मेरी हिंदी भाषा है जिसकी विश्व भी कायल है हिंदी की जय हिंदुस्तान की जय । रामचरितमानस , गीता आदि जिस भाषा की देन हैं उस भाषा की सदा  हो जय विश्व भी उसका लोहा माने हिंदी भाषा हो विश्व विजय हिंदी की जय हिंदुस्तान की जय । -रजत द्विवेदी 

इंकलाब की जय

इंकलाब की जय जय जय इंकलाब की जय हे भारत माँ के लाल भगत तेरे प्रयास की जय। इंकलाब की जय जय जय इंकलाब की जय। कलम उठा कर जो तूने इतिहास का नया अध्याय लिखा देश के युवाओं को जगा जो तूने ये परोपकार किया तेरे मन में जगने वाले उस उपकारी आभास की जय। इंकलाब की जय जय जय इंकलाब की जय। तेरे स्वर से डर कर जब ब्रिटेन भी थर्रा उठा तेरे विस्फोटक चिंगारी से उनका सीना घबरा उठा। उस चिंगारी की लपटें जो खुद इंकलाब थी पुकारतीं । उन लपटों की हो सदा निरंतर रहे यहां पर कीर्ति अभय। इंकलाब की जय जय जय इंकलाब की जय। अपने जीवन को त्याग जो तूने भारत का उद्धार किया अपना नाम भुला तूने जो आजादी का प्रचार किया भारतवासी को जो तूने दिया उस इंकलाब के विश्वास की जय। इंकलाब की जय जय जय इंकलाब की जय। हम याद रखेंगे सदा तुझे जो तूने दिया बलिदान अभय तू सदा अमर था अमर रहेगा तेरी कीर्ति है अमर अजय। इंकलाब की जय जय जय इंकलाब की जय। -रजत द्विवेदी

TU KAUN DES SE AAYA H?

Tu kaun des se aaya h? Tu kaun des se aaya h?   Tu kaun des se aaya h?   Kuch to keh na uske  baare mein   Tu jaun des se aaya h.   Main bhi to jaanu   Kitni sundar hai   Woh mitti   Woh des tera?   Tu jaun des se aaya h. Kya batalaun tujhko raahi   Main kaun des se aaya hun.   Kya batalaun uski gaatha   Main jaun des se aaya hun. Lafz hi kam pad jaayenge   Waqt bhi tham jaayega    Jab bolunga main tujhko ki   Main kaun des se aaya hun. Par poonch liya jo tune ye   To main tujhko batlata hun   Veeron ki uss dharti ki   Tujhko bhi katha sunata hun   Jab jaanega tab manega    Main jaun des se aaya hun. Yeh veer  dhara paavan dharti Iski anmit ye gaatha hai Nimish matra ye manav Phir bhi tujhko sunata hai Sindhu ghati ki sabhyata hai J...