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प्रबल त्याग की वीर गाथा

प्रबल त्याग की वीर गाथा 

Image result for panna dhai and udai singhप्रबल त्याग की वीर गाथा 
जिसको है इतिहास  भी गाता 
जो वीरों का मान बढ़ाता 
रणधीरों की पहचान बताता 
प्रबल त्याग की वीर गाथा ।

चीख रही चित्तोड़ हवेली
खेली जहाँ थी खून की होली ।
आज भी है वहाँ गूँजती
उस अमर त्याग की वीर गाथा ।
                                                                             
घोर घनेरी रात वो थी
लगती अमावस रात वो थी ।
शोणित से सनी तलवारें गूँजी
भय से व्याकुल मन थर्राया ।
लेने इक मासूम का जीवन
बनबीर वहां पर तब आया ।
सत्ता की लालच में उसने
अपनों का था रक्क्त बहाया ।
पता चले है जीवित वारिस
तब खडग उठा था वह लाया ।

जब\तक उदय सिंह है जिन्दा
कैसे मेवाड़  मेरा होगा ।
सोच लिया मैं जीतूँगा
उदय को अब मारना होगा ।
चल निकला वह राजभवन
खोज रहा था वारिस को।
भूल गया लेकिन वहाँ था कोई
जो बचा रहा था वारिस को ।

पन्ना ने अपने राजदुलारे
लाल को खुद से दूर किया।
बचा सके ताकि वो उदय को
अपने लाल का त्याग किया ।
बदल दिया था बच्चों को
उदय को अपना लाल कहाँ ।
सुला दिया अपने बेटे को
निर्मम मौत थी खड़ी  जहाँ ।

जब आया वह क्रूर वहाँ
अपने लाला को उदय बताया ।
उसकी मौत के शोक में
बहते आँसू को छुपाया ।
क्या दे सकता है  त्याग कोई ऐसा
दिया था पन्ना धाई ने जैसा ।

अमर त्याग वीर गाथा ।

उपकार किया मेवाड़ पे जिसने
याद करे हर वीर है जिसको ।
कर्म पर अपने डटी सदा ।
पन्ना उदय की जीवनदाता ।
मातृप्रेम की सुंदर कथा ।
प्रबल राजप्रेम की गाथा ।

अमर त्याग की वीर कथा ।
प्रबल त्याग की वीर गाथा ।





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